Saturday, 5 May 2018

धूप राधा तिवारी ' राधेगोपाल '


धूप

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दूर तक माटी की खुशबू , आ रही हैं धूप में  l
काम करते खेत में,  कैसे ये निर्बल धूप में  ll

बूँद है ये श्वेद की , या रंग मेहनत का भरा  l
काम करता वो ही जाने , कैसे होता धूप में  ll

आंधीयों ने अब उजाड़ा, है ये किसका घोसला  l
अब  कहाँ ले जाएगा , बच्चे परिंदा धूप में  ll

मेहनती होते हैं जो ,नही देखते हैं रात दिन  l
काम वो करते सदा ,आंधी , सर्दी , धूप में  ll

जेठ का ये माह है , सूरज चटक है शीश पर l
राधे निकल कैसे पड़ें , इस तन जलती धुप में  ll