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Thursday, 23 April 2020
Saturday, 28 March 2020
कुण्डलियाँ ," कजरा " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
कजरा
कजरा नैनों से कहे, सुन लो मेरी बात। दो नैनों की है मिली, मुझको भी सौगात।। मुझको भी सौगात, कहे सब मुझको काला। देती मेरा साथ, सदा ही बिंदी माला। कह राधे गोपाल, लगा चोटी में गजरा। सुन लो मेरी बात, कहे नैनों से कजरा।। |
Wednesday, 25 March 2020
कुण्डलियाँ , " कुंडलीयाँ " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
कुमकुम
कुमकुम भर के माँग में, नार करे श्रृंगार । फेरे लेकर सात वो, आती पिय के द्वार। आती पिय के द्वार, विदाई करती माता। वर जी आए द्वार, बदलता भाई छाता।। कह राधे गोपाल, पिता जी क्यों है गुमसुम। नारी का श्रृंगार, सदा से ही है कुमकुम। |
Tuesday, 24 March 2020
कुण्डलियाँ , " काजल " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
काजल (3)

काजल आँखों पर लगा, नैन रही मटकाय।
देख सजन को सामने, गोरी भी इठलाय।।
गोरी भी इठलाय, झुका वो नैना बोले।
मुस्काती वो आय, सजन सम्मुख वो डोले।
कह राधे गोपाल, सजन को देखे हरपल।
नैन रही मटकाय, लगाकर वो तो काजल।।
कुण्डलियाँ , " गजरा " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
गजरा ![]() लेके गजरा हाथ में, साजन जी मुस्काय। सजनी जी के बाल पे, पिन से वो अटकाय।। पिन से वो अटकाय, करे वो बातें मन की। सोनी सी हो नार,अरे मेरे जीवन की। कह राधे गोपाल, लुभाओ कजरा देके। जाओ साजन धाम, सदा तुम गजरा लेके।। |
Sunday, 1 March 2020
कुण्डलियाँ ,सड़कों का हाल (राधा तिवारी" राधेगोपाल ")
सड़कों का हाल बदतर अब होने लगा, है सड़कों का हाल। पैदल जो भी चल रहे, वो होते बेहाल।। वो होते बेहाल, सड़क ढूँढे फिरते हैं। गड्ढों में है पैर, तभी तो वह गिरते हैं। कह राधे गोपाल, रहोगे कब तक घर पर। सड़कों का अब हाल, हुआ है बद से बदतर। गाड़ी का टायर कहे, हम होते बेहाल। देख अचंभित हो रहे, हैं सड़कों का हाल।। है सड़कों का हाल, दुखी है जनता सारी। सड़क बने हैं ताल, ये कैसी है लाचारी। कह राधे गोपाल, कह रहा है ये शायर। पक्चर होता जाय, सदा गाड़ी का टायर।। |
Saturday, 29 February 2020
Tuesday, 25 February 2020
कुण्डलियाँ , " वेणी " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )
वेणी
वेणी प्यारी सी बने, यदि हो लंबे बाल। नागिन जैसी लग रही, गोरी की तो चाल।। गोरी की तो चाल, लगे हैं सबको प्यारी। रानी बनकर राज, करे हर घर में नारी । कह राधे गोपाल, प्रथम नारी की श्रेणी। नारी की है शान, बनी बालों की वेणी। |
Monday, 24 February 2020
Tuesday, 31 December 2019
कुण्डलियाँ , " बात " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )
बात
प्रेमी आपस में करें, आंखों से ही बात। शब्दों के आधार तो, पहुंचाते आघात।। पहुंचाते आघात, बात कर सोच समझ कर। करना मत तकरार, सुलझती बातें मिलकर। कह राधे गोपाल, लगाओ नेह सुयश में। मिलकर रहना साथ, सदा प्रेमी आपस में।। लगातार ही आ रही बारिश चारों ओर कहीं बाढ की है दशा कहीं मेघ का शोर कहीं मेघ का शोर फटे अब क्यों पर बादल धरती पर तो नीर घूमता बनके पागल कह राधे गोपाल करेंगे वृक्ष पार ही बोते रहना पेड धरा पर लगातार ही |
Monday, 30 December 2019
Sunday, 29 December 2019
कुण्डलियाँ, " कुल्हाड़ी ", (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )
कुल्हाड़ी
सुख-दुख जीवन में सदा, आते एक समान | सुख जल्दी से बीतता, दुख लाता व्यवधान | दुख लाता व्यवधान, झलकती पीड़ा भारी | ईश्वर करता दूर, सखे पनपती पीर तुम्हारी | कह राधे गोपाल, तसल्ली रक्खो मन में | आते रहते पास, अरे सुख-दुख जीवन में || कुल्हाड़ी का तुम कभी, मत करना उपयोग | पेड़ों के बिन जगत मेंं, बढ़ जाएँगे रोग | बढ़ जाएँगे रोग, उगाओ पेड़ धरा पर | सूखी बंजर भूमि, अरे तू हरा-भरा कर | कह राधे गोपाल, बोलती सदा पहाड़ी | पेड़ बचा लो मित्र, फेंककर दूर कुल्हाड़ी || |
कुण्डलियाँ, " जलकर काया भस्म " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )
जलकर काया भस्म
जीवित रहने के लिए, खाते हैं अवलेह |
खाते हैं अवलेह, पी रहे हैं गंगाजल |
खबर नहीं है यार, अरे क्या होगा प्रतिफल |
कह राधे गोपाल, रहो आपस में मिलकर |
माटी की है देह, भस्म हो जाए जलकर ||
: काम, क्रोध, मद, लोभ से, रहना हरदम दूर |
करके अच्छे काम को, होते सब मशहूर |
होते सब मशहूर, कभी नफरत मत पालो |
बांटो हरपल प्यार, फूट को कभी न डालो |
कह राधे गोपाल, रहो तुम सदा बोध में |
हो जाता नुकसान, हमेशा काम-क्रोध में ||
: मात-पिता के सामने, करो न ऊँची बात |
अपनी बातों से कभी, देना मत आघात |
देना मत आघात, वही हैं मीत घनेरे |
बनकर के मजदूर, बनाए सुंदर डेरे |
कह राधे गोपाल, जिंदगी दुखी बिता के |
देते हैं आकाश, सितारे मात-पिता के ||
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