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Thursday, 23 December 2021

राधा तिवारी "राधेगोपाल" , दोहे , लेकर डंडा हाथ

 


लेकर डंडा हाथ
मिला तुम्हारा प्यार जब, भूली में संसार।
ईश्वर से कम है नहीं, सजन तुम्हारा प्यार।।

नैनो में काजल बसा, बिंदी सोहे भाल।
हाथ मुरलिया सज रही, गल बैजंती माल।।

साया बनकर राधिका ,चलती हरदम साथ।
कान्हा जी तुम भी चलो, ले हाथों में हाथ।।

दौलत हमको रोग से, बचा रही कब आज।
घर में ही बैठा दिया ,बंद किए सब काज।। 

बड़ा भयंकर वायरस, आया है श्रीमान।
बैठो सब निजधाम में, रहे सुरक्षित जान।।

हाथ मिलाने से बड़े ,संक्रमण का रोग।
हाथ जोड़कर कर रहे, नमस्कार सब लोग।।

जुटे हुए सब तंत्र है, जुटा राज दरबार ।
संकट के इस काल से, कैसे होंगे पार ।।

पुलिस प्रशासन बोलता, दे दो तुम भी साथ।
वरना हम सब हैं खड़े, लेकर डंडा हाथ।।

बंद सभी उद्योग हैं, बन्द सभी औजार। 
सरकारी सब तंत्र भी,होता जाता ज़ार।।

Thursday, 9 December 2021

राधा तिवारी राधेगोपाल , दोहे , जनरल विपिन रावत 08/12/2021

 



जनरल विपिन रावत
08/12/2021

सूरज बन चमका सदा, हुआ आज क्यों लुफ्त।
चलते चलते लोग सब, हुए आज क्यों सुप्त।।

देश भक्ति परिवार में ,भरी रही भरपूर।
पौड़ी उत्तराखंड के ,लाल है मशहूर।।

लक्ष्मण सिंह पापा बने , घर में जला चिराग।
बन जनरल रावत विपिन,जगा दिया है भाग।।

माता कोलिन कोच को,मिला यही सम्मान।
गोदी में खेले विपिन,बनकर उनकी शान।।

मधु रस घोले मधुलिका , भर जीवन में रंग।
बँधी प्रीत की डोर से,मरी उन्हीं के संग।।

साथ निभाने के लिए ,रहती हरदम पास ।
जनरल को हरदम रही, उनसे हर पल आस।।

शिक्षा दिक्षा के लिए, गए देहरादून।
अब क्यों उनका हो गया, यह जीवन भी सून।।

फौजी बन करके किए,पालन सब कानून।
जीवन भर महका सदा ,बनकर वही प्रसून।।

काम सभी उसने किए ,बनकर सदा दबंग।
अरि सेना को भी यहाँ, दिखा दिए थे रंग।।

दुश्मन को देते रहे ,विपिन सदा जवाब ।
बन करके ही वे रहे, खुलती एक किताब।।

बात सभी की आपने ,हरदम सुनी जनाब।
दुश्मन को देते रहे ,हर पल आप जवाब।।

काम सदा अच्छे किए, मिले खूब सम्मान।
आज अचानक ही गए, छोड़ सभी पहचान।।

भारत माँ के लाल ने, लिया तिरंगा ओढ़।
जलकर वाहन हो गया, जैसे होता कोढ़।।

भारतवासी हो गए, देखो सारे मौन।
गए वीर यह जिस तरह, जाता ऐसे कौन।।

याद करेगी यह धरा, और सदा आकाश।
चार दिशा में फैलता ,देखा आज प्रकाश।।

दुखी आज संसार है ,आंँखें हैं गमगीन।
तेज लुप्त सा हो गया, जो था कल रंगीन।।

राधा तिवारी "राधेगोपाल"
एल टी अंग्रेजी अध्यापिका
 खटीमा,उधम सिंह नगर
 उत्तराखंड
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Wednesday, 8 December 2021

राधा तिवारी "राधेगोपाल" , दोहे , जीने का ढंग

 

 जीने का ढंग 


 नेह रखो मन में सभी ,मत रखना अभिमान ।
मन वाणी से शब्द हो ,मिले उसी को मान।।

रावण का अभिमान भी ,हुआ यहाँ पर चूर।
 हुए  अंत में राम ही ,इस जग में मशहूर।।

अभिमान करना नहीं ,राधे रखना ध्यान ।
जीवन है दो-चार दिन ,बन कर रहना शान ।।

छोटा सा यह वायरस ,दिखा रहा है रंग ।
सिखा रहा है आज फिर , यह जीने का ढंग  ।।

घर के अंदर ही मनुज ,  मिलता जीवनदान ।
हाथ जोड़कर ही करें, इसका आप निदान।।

धैर्य  रखो मन में सदा ,हार मिले या जीत। 
हाथ जोड़कर कीजिए ,अपनों से तुम प्रीत।।

कोरोना अब हिंद में, रहे पसारे पैर ।
घर में रहकर ध्यान दो ,नहीं करो अब  सैर ।।

हाथ जोड़कर कर रही ,राधे विनती आज ।
मानव ही बन कर रहे ,जीवन में सरताज।।



राधा तिवारी"राधेगोपाल" 
खटीमा 
उधम सिंह नगर 
उत्तराखंड
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Tuesday, 7 December 2021

राधा तिवारी ,राधेगोपाल ,दोहे, वन संपदा

 


 वन संपदा
संसाधन जग में मिले, सब को एक समान।
 इन संसाधन को सदा, देना तुम तो मान।।

 वन संपदा ही रहे, सदा देश की शान।
 पेड़ उगा कर आप भी, लेना जीवनदान।।

 नहीं पेड़ को काटकर, धरा करो बर्बाद। 
पेड़ों से है जिंदगी, जीव जंतु आबाद।।

 जल को अमृत मान कर सदा दीजिए मान। 
पानी की हर बूंद का करना तुम सम्मान।।

राधा तिवारी"राधेगोपाल" 
खटीमा 
उधम सिंह नगर 
उत्तराखंड
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Monday, 14 June 2021

राधा तिवारी राधेगोपाल ,दोहे ,भोजन

 


भोजन

देवदूत बन आ रहे, धरती पर भगवान।
प्राण बचाने के लिए, बने यहां इंसान।।

कहीं रोकते रास्ता, कहीं दे रहे दान ।
भोजन ही सबसे बड़ा, दान यहां श्रीमान।।

आडंबर करना नहीं, रहना सब निजधाम।
रहकर सबसे दूर ही, कर लेना आराम।।

कठिन समय को देखकर, धरना हरदम धीर।
 क्रूर काल से आपको, बचा रहे रघुवीर।।

प्रेम प्रीति में है भरा, यह सारा संसार ।
राधे हरदम ही करो, सबसे शुभ व्यवहार।।

गए प्रेम वश राम जी, जब शबरी के द्वार।
 खाकर जूठे बेर को, दिया उसी को तार।।

 संदेश दिलों का ला रहा, ढाई आखर प्रेम।
प्रियतम की तस्वीर को, छिपा रहा बन फ्रेम।।

पुलकित यह जग हो रहा, जब मिले प्रेम की राह।
फूल बिखरते जाएंगे ,गर मन में हो चाह।।

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Wednesday, 9 June 2021

राधा तिवारी राधेगोपाल, दोहे , भागीरथ भगवान

 


भागीरथ भगवान


 साफ सफाई का रखो,, राधे हरदम ध्यान ।
हाथ मिलाने से करे ,कोरोना नुकसान ।।

गंगा लेकर आ गए, भागीरथ भगवान।
जल पी करके मिल रहा, सब को ही वरदान।।

पूजा के हर काम में, लेते गंगा नीर ।
जल पावन ये तीर्थ का ,रचता है तकदीर।।

प्रेम प्रीत व्यवहार ही, बना हिंद की शान ।
प्रेम बोल से ही बढे,जग में सब का मान।।

 माया के बल हो रहे ,दानव  अंतर्ध्यान ।
लेकिन उनके सामने ,ईश्वर थे बलवान।।

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Friday, 28 May 2021

दोहे, सीता सोचे राम को

 






सीता सोचे राम को

मिला यहाँ पर राम को, दारुण दुख संताप।
 कभी-कभी निज काम का, होता पश्चाताप।।

सीता सोचे राम को, यहाँ  सदा दिन रैन।
 सुनकर बातें राम की, मिलता उसको चैन।।

सच ही कहने का यहाँ , करना सदा प्रयास।
 झूठ बोलकर टूटता, सबका ही विश्वास।।

 सोच यदि अच्छी रहे, अच्छा हो परिणाम।
 भजने से श्रीराम को, बनते सारे काम।।

 किया गदे से मारकर, राक्षस का संहार।
 हनुमत का तो तेज था, केवल मुट्ठी प्रहार।।

धन्य हुई माँ  भारती, पाकर पुण्य पीयूष। 
महत्व ले उगता रहा, यहाँ घास अरु फूस।।
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Sunday, 11 October 2020

दोहे अच्छा शिक्षक (राधा तिवारी "राधेगोपाल ")





अच्छा शिक्षक 

शिक्षक से करना सदा ,अपने मन की बात ।

अपने घटिया काम से ,देना मत आघात।।

 

अंग्रेजी को मान दो, केवल भाषा जान।

हिंदी का तो मत करो ,कभी कहीं अपमान ।।

  

पढ़ने से होता सदा ,शब्दों का विस्तार।

शब्दकोश बढ़ जाए तो, होता बेड़ा पार।।


वक्त सदा हर पाप का, करता है इंसाफ।
खुद से ही गर छल किया, फिर कौन करेगा माफ।।

कोरोना करने लगा, सबसे ही संग्राम।
हाथ पैर धो लीजिए, सब ही सुबहो शाम।।





Sunday, 5 July 2020

दोहे , जीवन की पतवार" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),


जीवन की पतवार

 राज सभी पर कर रहा, एक विदेशी रोग।
डरे डरे से हैं सभी, सकल विश्व के लोग।।

राधे लो संकल्प को, रह लेना निज धाम।
रोग बड़ा गंभीर है, कोरोना है नाम।।

चूक अगर थोड़ी हुई , फैलेगा यह रोग।
हाथ मिलाना छोड़ दो, दूर रहो सब लोग।।

हाथ जोड़कर कीजिए, सबका ही सत्कार।
कोरोना करता नहीं ,इन पर कभी प्रहार ।।

साफ सफाई का रखो,, राधे हरदम ध्यान ।
हाथ मिलाने से करे ,कोरोना नुकसान ।।

हाथ सौंप दो ईश के, जीवन की पतवार।
आसानी से राधिका, हो जाओगे पार।।

डरो नहीं इस रोग से, हो जाओ तैयार।
रहो अकेले शान से, होगा इस पर वार ।।


घर पर ही सब बैठ कर, ले लो हरि का नाम ।
राधे ने सबको दिया, एक यही पैगाम ।।


घर में रहने से नहीं, लगता कोई पाप।
इससे तो घटता सदा, कोरोना का ताप ।।

करना है गर आपको, कोरोना को चूर।
कुछ दिन तो रहे लीजिए, अपनों से तुम दूर ।।

कोरोना के नाम से, आया कैसा रोग।
माता तुम भी ध्यान दो, डरते सारे लोग।।

गाँव घरों को आ रहे, हैं विदेश से लोग।
फिर क्यों अपने देश में ,रहे विदेशी रोग।।

Monday, 15 June 2020

दोहे , बंद करो सब द्वार " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

बंद करो सब द्वार 

घर में ही सब बैठ कर, कर लो मन की बात।
कोरोना को तब चले, पता अपनी औकात।।

बोल रही है आज तो,धरती पर मेवाड़।
अब मुझको अच्छे लगे, खिड़की और किवाड़।।

अपने ही घर में रहो ,बंद करो सब द्वार ।
अपना ही परिवार है, अपना ही संसार।।

मिलती है छुट्टी नहीं, इतनी तो सरकार।
 परिवार के साथ में, रह लो हर दिन बार।।

तन की दूरी ही रखो, मन से रहना पास।
 कभी तोड़ मत दीजिए, अपनों का विश्वास।।


Sunday, 31 May 2020

दोहे ,संकल्प " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),


संकल्प 
Coronavirus In Punjab: 11 New Coronavirus Positive Cases Found In ...
राधे लो संकल्प को, रह लेना निज धाम।
रोग बड़ा गंभीर है, कोरोना है नाम।।

चूक अगर थोड़ी हुई , फैलेगा यह रोग।
हाथ मिलाना छोड़ दो, दूर रहो सब लोग।।

हाथ जोड़कर कीजिए, सबका ही सत्कार।
कोरोना करता नहीं ,इन पर कभी प्रहार ।।

साफ सफाई का रखो,, राधे हरदम ध्यान ।
हाथ मिलाने से करे ,कोरोना नुकसान ।।

हाथ सौंप दो ईश के, जीवन की पतवार।
आसानी से राधिका, हो जाओगे पार।।

डरो नहीं इस रोग से, हो जाओ तैयार।

रहो अकेले शान से, होगा इस पर वार ।।