Tuesday, 10 March 2020

मनहरण घनाक्षरी ," रंगों का त्योहार " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),



रंगों का त्योहार
रंगों का त्योहार आया
खुशी चारों ओर लाया
हाथ में गुलाल लेके
आप भी तो आइए

 गुजिया के थाल सजे
 ढोलक मंजीरे बजे
 राधे के तो साथ में
 आप भी तो गाइए

 बरसे गुलाल लाल
करे होली में धमाल
सखी अपने साथ तो
 राधा को नचाइए

रंग हरा लाल पीला
कृष्ण ने राधा पे डाला
कृष्ण को भी आप रंग
प्यार का लगाइए

अबिर गुलाल लेके
नेह सबको ही देके
राधे के तो साथ आप
कृष्ण को भीगाइए

Monday, 2 March 2020

कुंडलियां , " डोली " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )


 डोली
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 डोली में वो बैठके, जाती जब ससुराल।
 सोचो बेटी के बिना, मात-पिता का हाल।।
 मात-पिता का हाल, जगत के लोगों जानो।
भेज रहे परदेस,कलेजा अपना मानो।
कह राधे गोपाल, चमकती चुनर चोली।
 जाती है ससुराल, सुता चढ़ करके डोली ।

Sunday, 1 March 2020

कुण्डलियाँ ,सड़कों का हाल (राधा तिवारी" राधेगोपाल ")



सड़कों का हाल
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 बदतर अब होने लगा, है सड़कों का हाल।
 पैदल जो भी चल रहे, वो होते बेहाल।।
 वो होते बेहाल, सड़क ढूँढे फिरते हैं।
 गड्ढों में है पैर, तभी तो वह गिरते हैं।
 कह राधे गोपाल, रहोगे कब तक घर पर।
 सड़कों का अब हाल, हुआ है बद से बदतर।

 गाड़ी का टायर कहे, हम होते बेहाल।
 देख अचंभित हो रहे, हैं सड़कों का हाल।।
 है सड़कों का हाल, दुखी है जनता सारी।
 सड़क बने हैं ताल, ये कैसी है लाचारी।
 कह राधे गोपाल, कह रहा है ये शायर।
 पक्चर होता जाय, सदा गाड़ी का टायर।।

Saturday, 29 February 2020

कुण्डलियाँ , " कंगन "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

 
 कंगन 

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कंगन सोने के बने, चाँदी की पाजेब।
 पहनो गोरी ये सभी, जाओ पिय के देश।।
 जाओ पिय के देश, बसाओ अपने घर को।
जा बेटी ससुराल, वरण करलो तुम वरको।
कह राधे गोपाल, बिखेरे खुशबू चंदन।
 लाओ तुम गलहार, सजन हाथों के कंगन।।

कुंडलियां , " पायल " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )




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पायल
पायल के घुँघरू कहे, चल साजन के पास।
 साजन तो अच्छे लगे, हर दिन बारह मास।
 हर दिन बारह मास, करेंगे हम तो छन छन। चूड़ी सबके हाथ,बजेगी  खन खन खन खन।
 कह राधे गोपाल, सजन को करदूँ कायल।
 जाऊँ उनके पास, पहन के मैं तो पायल ।।

Tuesday, 25 February 2020

कुण्डलियाँ , " वेणी " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )


वेणी
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वेणी प्यारी सी बने, यदि हो लंबे बाल।
 नागिन जैसी लग रही, गोरी की तो चाल।।
 गोरी की तो चाल, लगे हैं सबको प्यारी।
 रानी बनकर राज, करे हर घर में नारी ।
कह राधे गोपाल, प्रथम नारी की श्रेणी।
 नारी की है शान, बनी बालों की वेणी।

Monday, 24 February 2020

कुण्डलियाँ , "फूल " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )


फूल
फूल खिले हैं डाल पे, महक उठा है बाग।
 बैठ डाल पर आम की, कोयल गाती राग।
 कोयल गाती राग, भ्रमर तितली भी डोले।
 आओ रस लो बाँट, मधुमक्खी भी बोले।
कह राधेगोपाल, पथिक को शूल मिले हैं।
 आओ देखो बाग, डाल में फूल खिले हैं।