राष्ट्रप्रेम दिल में उठे, जिसके तो हर बार।
उसकी तो जय कर रहा, हरदम ही संसार।।
विकट घड़ी में भी नहीं, करता जो अभिमान।
उसका तो करते सभी, जीवन में सम्मान
कठिन डगर को देखकर, मत खोना तुम धीर।
हिम्मत से ही कर रहे, काम सफल रणवीर।।
बंद हुए सब धाम में,आया संकटकाल ।
साधु जल्दी बदल रहे,हैंअब अपनी चाल ।।
साफ सफाई का रखो,तुम तो हरदम ध्यान
भीड़-भाड़ से बच रहे, अब तो साधु सुजान।।
सूक्ष्मजीव कोरोना,आया कैसा रोग।
संकट में धरती पड़ी, विचलित सारे लोग ।।
कठिन राह को देखकर,मत रुक जाना आप।
संकट के तो काल में,करो राम का जाप।।
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Tuesday, 12 May 2020
दोहे , राष्ट्रप्रेम " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
Monday, 11 May 2020
दोहे*" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
*चाँदनी, सूरज, इंतजार ,फुल, पत्थर*
इंतजार करने लगी, राधा किसका आज।
रात चाँदनी आ गई, अब तो आओ बाज।।
पत्थर दिल इंसान तो, क्या समझेगा प्रीत।
प्रेम प्रीत से ही सदा जीवन को तू जीत।।
उपवन में मेरे खिले, रंग-बिरंगे फूल।
मैंने प्रिय की राह से, हटा दिए सब शूल ।।
बेमौसम बरसात से,होना मत हलकान ।
सूरज से होती सदा, सबकी ही पहचान।।
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Sunday, 10 May 2020
दोहे, माँ " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
माँजन्म दिया माँ ने हमें,दिखा दिया संसार।माँ ही बच्चे को करे,भवसागर से पार।।माँ की ममता का नहीं,होता कोई मोल।माँ तो जीवन में सदा,होती है अनमोल।।कैसे भी हालात हो,माँ रहती है पास।जीवन पथ पर आप भी,माँ से रखना आस।।जिसके सर पर तो सदा,रहता माता का हाथ।समझो उसके साथ में,है देवी का साथ।।माता बच्चे के लिए,मरने को तैयार।दुख के पल में वह करे,पल भर में उद्धार।।राधे को माँ पर सदा,होता है अभिमान।माता बन कर दे रही,बच्चों को वरदान।।
Saturday, 9 May 2020
दोहे , माँ " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
*विश्व मातृ दिवस की सबको हार्दिक शुभकामनाएं*विधा *दोहे*विषय *माँ*पिता तुम्हारा प्यार तो, है जग में अनमोल।माँ की ममता को यहाँ, कौन सकेगा तोल।।1।।जन्म दिया माँ ने हमें, दिखा दिया संसार।माँ ही बच्चे को करे, भवसागर से पार।।2।।माँ की ममता का नहीं, होता कोई मोल।माँ तो जीवन में सदा, होती है अनमोल।।3।।कैसे भी हालात हो, माँ रहती है पास।जीवन पथ पर आप भी, माँ से रखना आस।।4।।राधे को माँ पर सदा होता है अभिमान।माता बन कर दे रही बच्चों को वरदान।।5।।
गीत , *रक्तबीज कोरोना* " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
*रक्तबीज कोरोना*
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बिमारी
मानव घर में छिप कर बैठा
है उसकी कैसी लाचारी
क्यों आया ये कहाँ से आया
ये तो हमको पता नहीं
मार रहा है निर्दई हो कर
जिनकी कोई खता नहीं
रोग बना है बड़ा तामसी
जकड़ी है दुनिया सारी।
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
खाकी वर्दी धारी आए
साथ में अपने डॉक्टर लाए
साफ सफाई करने देखो
हमने कितने ईश्वर पाए
हँसते गाते खुश हो करके
खेल रहे सब अपनी पारी
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
जीव जंतु के जैसे हम सब
पिंजर में है आज फँसे
घूम रहे हैं वह सब देखो
और हमीं पर आज हँसे
आल्हादित्त मत होना इंसान
भीर सभी पर है भारी
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
*गीत*
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बिमारी
मानव घर में छिप कर बैठा
है उसकी कैसी लाचारी
क्यों आया ये कहाँ से आया
ये तो हमको पता नहीं
मार रहा है निर्दई हो कर
जिनकी कोई खता नहीं
रोग बना है बड़ा तामसी
जकड़ी है दुनिया सारी।
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
खाकी वर्दी धारी आए
साथ में अपने डॉक्टर लाए
साफ सफाई करने देखो
हमने कितने ईश्वर पाए
हँसते गाते खुश हो करके
खेल रहे सब अपनी पारी
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
जीव जंतु के जैसे हम सब
पिंजर में है आज फँसे
घूम रहे हैं वह सब देखो
और हमीं पर आज हँसे
आल्हादित्त मत होना इंसान
भीर सभी पर है भारी
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी
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Thursday, 7 May 2020
राधा तिवारी "राधेगोपाल " दोहे , ( शालिग्राम)
शालिग्राम
कृष्ण सुदामा की तरह, मिले नहीं अब मीत।
बिन मतलब के अब नहीं ,करता कोई प्रीत।।
साधू संतों का किया, जिसने भी अपमान।
फिर उसको कैसे मिले, इस जग में सम्मान।।
अश्रु धार बहती रहे, देख पराई पीर,
पर राधे होना नहीं, जग में कभी अधीर।।
पत्थर के भगवान, को पूज रहे हैं लोग।
भूखे का करते नहीं, पर जग में सहयोग।।
पुण्य कमाने के लिए, गंग नहाते लोग।
स्वच्छ नदी को कीजिए, करके तुम सहयोग।।
शालिग्राम भगवान को,दूध चढ़ाते लोग।
निर्धन को तो दूध का, करें नहीं सहयोग।।
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दोहे ,*पानी का मोल* " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
*पानी का मोल*
व्यर्थ नष्ट मत कीजिए, पानी
है अनमोल।
इससे ही तो है सदा, स्वाँसों
का भी मोल।।
पानी जीवन है यहाँ, रखना
इतना ध्यान।
पानी की हर बूँद को, दे
देना सम्मान।।
सूख गई नदियाँ सभी, सूख
गए हैं ताल ।
पानी का संचय करो, रहने
को खुशहाल।।
राधे कहती आपको,पानी
है अनमोल।
पानी के बिन जीव का, जीवन
है बेमोल।।
पानी को तुम जानिए, कुदरत
का उपहार।
सपना जीवन का यहाँ, इसके बिन बेकार।।
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