Sunday, 14 November 2021

राधा तिवारी , " राधेगोपाल" , दोहा छंद , "आजादी"

 


 - *आजादी*
विधा - दोहा छंद


*आजादी* फिर छीनता, एक विदेशी रोग।
बैठ गए अब धाम में,सकल विश्व के लोग।।1।।

*आजादी* से घूमना, मूरख की पहचान।
सुन लो जब तक जान है, सुंदर लगे जहान।।2।।

*आजादी* मत दो उसे, रखो कैद में रोग।
बचने को इस रोग से, करते रहना योग।।3।।

*आजादी* यदि चाहिए, रखना इतना ध्यान।
हाथ जोड़कर कीजिए, सबका ही सम्मान।।4।।

कोरोना अब खेलता,देखो कैसा खेल,
 *आजादी* में खुद फिरे,मानव को दी जेल।।5।।

*राधा तिवारी"राधेगोपाल"* 

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