पुरस्कार उनको मिले, जो है उस के पात्र।।
दुनिया में सबसे बड़ा, होता है व्यवहार ।
बच्चों तुम करना नहीं, आपस में तकरार ।।
खेल यहां पर हैं सदा ,जीवन का आधार ।
बच्चों के संग आज तो, दौड़ रहा संसार।।
जब भी खेलो खेल तुम, इतना रखना ध्यान।
प्रतिभागी जितने यहाँ , सबका रखना मान ।।
इधर उधर है दौड़ते, बाल और गोपाल।
खेलकूद में चल रहे, मिला मिला कर ताल।।
होती है दो तरह की, उची लंबी जंप ।
करतब ऐसे देख कर, मन हो जाता कम्प।।
बच्चों जल्दी मत करो, लग जाएगी चोट।
इलाज में लग जायगें , मात- पिता के नोट ।।
|
Friday, 5 October 2018
दोहे " खेल सबौरा में हुए" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
Thursday, 4 October 2018
दोहे "ऊंचे तरुवर चीड़ के"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
ऊंचे तरुवर चीड़ के
ऊंचे तरुवर चीड़ के, पर्वत की है शान।
ब्रह्मकमल का सुमन तो ,पाता हरदम मान।
टेढा मेढा रास्ता, जाए कैसे गांव।
राह कटीली है सभी, फट जाते हैं पाँव।।
चले अगर सन्मार्ग पर, हरदम ही इंसान।
मुसीबतें उनको कभी, करे नहीं हलकान।।
शब्द बहुत अनमोल है ,बोलो रखकर ध्यान।
अच्छे शब्दों से सदा, मानव की पहचान।।
नहीं टूटने चाहिए, आपस के संबंध।
सच्चाई से कीजिए ,जीवन में अनुबंध ।।
वन उपवन में चल रही, शीतल मंद बयार।
रोज टहलने का करो, मन में आप विचार।।
|
Wednesday, 3 October 2018
दोहे " गुरुदेवकी बात को " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
क्रोध कभी मत कीजिए, करना सबसे प्यार।।
सूरज बिन अच्छा नहीं, लगता है आकाश।
चंदा सूरज जगत को, देते हैं प्रकाश ।।
मन बहलाने के लिए ,अब है साधन ढेर।
देर भले ही है यहाँ , पर नहीं है अंधेर।।
काम क्रोध मद लोभ से, रहना हरदम दूर।
इनका करके त्याग तुम, योग करो भरपूर।।
गुरुदेव की बात को, मत जाना तुम भूल।
इनकी मीठी बात से ,हटे राह के शूल।।
जीवन जीने के लिए, सबसे करना प्यार।
प्यार नहीं है वासना ,यह तो है उपहार।।
|
Tuesday, 2 October 2018
बाल कविता" चश्मा"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
बाल कविता
चश्मा
![]()
आंखों की जोत बढ़ाता है
साफ सदा दिखलाता है
दूर दृष्टि और निकट दृष्टि के
दोष को दूर भगाता है
कान के ऊपर बैठा रहता
नीचे नहीं गिर पाता है
आंखों को जो ढक कर रखता
वह चश्मा कहलाता है
|
Monday, 1 October 2018
गाँधी मोहनदास( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
गाँधी मोहनदास
जन्मे थे गुजरात में, गाँधी मोहनदास।
मन में उनके थी जगी, देशभक्ति की प्यास।।
सत्य अहिंसा धर्म थे, गांधी जी के ढाल।
बिना शस्त्र के सन्त ने, युद्ध किया विकराल।l
गाँधी दर्शन को अभी, भूल गए हैं लोग।
नेताओं को अब लगा, दौलत का ही रोग ।।
साफ-स्वच्छ होगा अगर, अपना भारत देश।
निर्मल होगा हर तरफ, अपना यह परिवेश।।
मक्कारों को मत करो, बार-बार तुम माफ।
सीमाओं से देश की, करो शत्रु को साफ।।
भले भलाई ही करें, दुष्ट कर रहे पाप।
करते अच्छे लोग ही, वन्दन-पूजा-जाप।।
|
Subscribe to:
Posts (Atom)


