विषय - होली
विधा - चौपाई छन्द
छुप छुप करके मोहन आए
जल भर गगरी वह छलकाए
बढ़चढ़ ग्वाले हिस्सा लीनी
गोपी को भी वो रंग दीनी
सखियाँ लाई सुंदर माला
गले राधिका के है डाला
बरसाने की सब नर नारी
रंगभरी लाए पिचकारी
नटखट राधा पनघट आई
पायलिया छम छम छमकाई
मुड़ मुड़ कर के श्याम निहारे
पर हर दम ही वो तो हारे
सब कहते राधा है भोली
सदा बोलती मीठी बोली
जब से वह मोहन की हो ली
होली खेले बन हमजोली
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Wednesday, 18 March 2020
चौपाई छन्द ," होली " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
Sunday, 15 March 2020
चौपाई छन्द , "सागर " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),
विषय - सागर
विधा - चौपाई छन्द
सागर होता कितना गहरा
लगा नहीं सकते हैं पहरा
जीव जंतु इसमें रहते हैं
गर्मी शीत सभी सहते हैं||
चलो देखते हैं परछाई
मम्मी आई ताई आई
पानी इसका कभी न ठहरा
लगा नहीं सकते हैं पहरा।।2।।
ज्यों जल बिन है मीन पियासी
त्यों मोहन बिन हैं बृजवासी
तरा सदा अंधा अरु बहरा
लगा नहीं सकते हैं पहरा।।3।।
ज्यों राधा बिन रहे साँवरा
भटके बनकर सदा बाँवरा।।
सागर होता कितना गहरा
लगा नहीं है इस पर मुहरा।।4।।
सागर में लहरों को पाया
मछुआरे ने जाल बिछाया
सुबह सवेरे छाया कुहरा
सागर होता कितना गहरा।।5।।
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Saturday, 14 March 2020
चौपाई छन्द , " अभिलाषा " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " ),
विषय - अभिलाषा
विधा - चौपाई छन्द
समझ रहे हैं सब की भाषा।
तुम समझो मेरी अभिलाषा।
समय कभी भी नहीं गवाँओ।
नेह सभी का जग में पाओ।।1।।
रात दिवस कहती है राधा।
कृष्ण हरो तुम मेरी बाधा।
मत तुम हमको कभी सताना।
रूठ गई तो हमें मनाना।।2।।
पास हमारे मोहन आओ।
पनघट तक मुझको पहुँचाओ।
पूरी कर राधा की आशा।
मत देना तुम कभी निराशा।।3।।
गूँज रही है कोयल काली।
खिले फूल अब डाली डाली।
बंसी की धुन अभी बजाओ।
गोपी ग्वाले पास बुलाओ।।4।।
तुमको गोपी सदा बुलाती।
हाँडी भर नवनीत खिलाती।
अब तो समझो सब की भाषा।
राधे की है ये अभिलाषा।।5।।
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Wednesday, 15 January 2020
चौपाई छन्द , " मकर संक्रांति "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
विषय - मकर संक्रांति
विधा - चौपाई छन्द
मकर सक्रांति पर्व है आया
उत्तरांचल पूरा हर्षाया
काले काले कौए आजा
मीठे मीठे घुघुते खाजा।।1।।
काँप रही सर्दी से काया
मुन्ना कोट पहन के आया
खालो गरम गरम घुघुते तुम
पर्व दिवस मत बैठो गुमसुम।।2।।
नानी ने उसको बतलाया
उसके मन का उसे दिलाया
तिल गुड़ को जो भी खाएगा
सर्दी से वो बच पाएगा ।।3।।
पतंग उड़ाओ मुन्ने राजा
आकर के मिष्ठान तो खा जा
लगा हुआ है देखो मेला
बच्चों का है रेला पेला।।4।।
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