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Friday, 26 July 2019

दोहे , " गुरु उन्हें हैं डांट " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )



गुरु उन्हें हैं डांटते 
गुरु उन्हें हैं डांटते, जिनसे करते प्यार।
 उन्हें न मिलता ज्ञान है, जो होते मक्कार।।
 
जिसकी होती गरज है, वह बन जाता खास।।
वरना पूरे विश्व में, मेला रहे उदास।।

होंठो पर बंसी लगा, बजा रहे घनश्याम।
ग्वाल बाल के हैं सखा, राधे के है श्याम।।

 बाँह थाम कर कृष्ण की, जग हो जाए पार।
जगत नियंता ही सदा, होते खेवन हार।।
जाहिर होता है वही, जैसी जिसकी सोच।
 सच को कहने में कभी, मत करना संकोच।।