स्वच्छ अगर परिवेश हो ,स्वस्थ रहे को जान।।
वर्षा के जल का करो, जीवन में उपयोग ।
गड्ढों में गर जल रहे, पैदा होते रोग।।
थोड़े से बच्चे करें ,उन्नति में सहयोग।
कागज गत्तों से करें, अपने यहाँ प्रयोग ।।
अस्पताल दिखता यहाँ , सफल है नगरा गांव।
हरे भरे परिवेश की, मिली हमको छावं।।
जल से सींचो पौध को, कर लो तुम व्यायाम ।
पढ़ने के संग खेल का ,है अपना आयाम ।।
वृक्षों से मिलती हमें, ठंडी ठंडी छांव।
मरहम यही लगा रहे, जब घायल हो पाँव ।।
पेड़ कभी ना काटना, मत लेना तुम दाम ।
वरना तो जल जाएगा, तेरा कोमल चाम।।
जल ही तो अनमोल है ,जल में सबकी जान ।
आते हैं जल के बिना, जीवन में व्यवधान।।
जीवन दाता पेड़ है, करते हैं उपकार।
पेड़ मनुज को दे रहे ,कुदरत का उपहार ।।
साफ सफाई में करो, सब अपना सहयोग ।
हरती सब की स्वच्छता, फैल रहे जो रोग।।
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Monday, 5 November 2018
दोहे, "वृक्षों से मिलती हमें, ठंडी ठंडी छांव" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
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