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Saturday, 11 May 2019

गीत, " चेतक " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


चेतक
Image result for चेतक घोड़ा महाराणा प्रताप
 कहे राणा महाराणा तुम्हें तो ये जगत सारा
तुम्हें  चेतक सदा लगता था अपने  प्राण  से प्यारा
बैठते  जब भी थे इस पर हवा से बात करता था 
 जब भी डोर खींची थी उछलने को मचलता था 
तुम्हारे साथ में राणा ये चेतक खूब जचता था 
तुम्हारे रण की नीति को सदा चेतक ही रचता था 
रोटी घास की खाई बिताई रात जंगल में
 मगर चेतक के संग रहकर रहे हरदम ही मंगल में
 जगतसिरमौर  थे तुम तो तुम्हारा अश्व था तारा
धरा से बात करता था दिखाता था गगन न्यारा