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Monday, 6 August 2018

ग़ज़ल " दूर तलक" (राधा तिवारी" राधेगोपाल ")

 दूर तलक
 तुम जाने से पहले हमसे मिलकर जाना भूल गए 
अपनी सारी याद के किस्से साथ ले जाना भूल गए।।
 दिन भर की सारी बातों को हम किसको बतलायेंगे।
 अब तो रातों में तुम मेरे ख्वाब में आना भूल गए।।
 दूर तलक जाते जाते तुमने मुड़ मुड़ के देखा था।
 लगता था जैसे तुम अपना हाल बताना भूल गए।।
 आते जाते सदा ही करते थे हमसे जोरा जोरी 
आज ना जाने क्यों तुम वैसे हमें सताना भूल गए।।
 बात-बात में अक्सर हमको तुम तो हंसाया करते थे।
 आंसू देकर चले गए तुम हम को हंसाना भूल गए ।।
याद तुम्हारी आएगी राधे को बहुत सताएगी 

कैसे तुम बिन रहना है हमको समझाना भूल गए।।
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