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Friday, 22 June 2018

मेरी कलम (राधा तिवारी "राधेगोपाल ")




मेरी कलम 



करती है मेरी कलम,  जब कोई आगाज।
 भरते हैं तब भाव भी, ऊंची सी परवाज ।।

करती मेरी लेखनी, दुनियाभर पर राज ।
अब तो जागो ओ मनुज, देती है आवाज ।।

देना मत मेरी कलम, कभी किसी को घाव।
 जीवो पर करना दया, रखना सरल सुभाव ।।

मसी लेखनी कर रही, अब विकास की बात ।
नहीं कभी भी किसी को, पहुंचाए आघात।।



दोहे " खुश हो रहा कुम्हार"( राधा तिवारी " राधेगोपाल ")


खुश हो रहा कुम्हार
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नमन तुम्हे करते सभी, ओ भारत के वीर ।
रक्षा में तैनात हो, सदा आप रणधीर।।

चाहे कितनी कठिन हो, इस जीवन की राह ।
जीवन जीने के लिए, मन में रक्खो चाह।।

रोज पुस्तिका में लिखो, अपने मन की बात ।
तभी समझ में आएगी ,खुद अपनी औकात।।

 तालमेल होता नहीं, सबके भिन्न विचार ।
एक रूप होता नहीं, सबका तो आकार।।

 मात पिता के साथ में, सुख मिलता चहुँ ओर।
 दुख के बादल जब छटें, मन हो जाए विभोर।।

 ईश्वर सबके साथ है ,रखना यह विश्वास।
 जो उनका वर्णन करें, वह बन जाता खास।।

माटी को तो रौंदकर,  खुश हो रहा कुम्हार ।
पीट-पीटकर पात्र को ,देता है आकार।।



Thursday, 21 June 2018

योग दिवस पर दोहे (राधा तिवारी " राधेगोपाल ")



योग दिवस पर दोहे 
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योग दिवस है विश्व का, मित्रों चैथा आज।
 सभी लोग को कर रहे, इसको बना रिवाज।।

 जिससे सारे दुख घटे ,सुख का होता योग।
 वह पल है आनंद का, जिसमें रहे निरोग।।

योग साधना कर रहा,  सारा हिंदुस्तान।
 योगी संतो से बनी, भारत की पहचान।।

 धन दौलत के मोह में, मत पड़ना इंसान ।
 अपना तन ही साथ दें ,व्यर्थ शेष तू जान।।

 साफ नहीं अपनी ध्रा, स्वच्छ नहीं परिवेश।
 ऐसे में कैसे मिले जीवन का संदेश।।

सुख की चाहत हो अगर  ,करो नियम से  योÛ।।
 निंदिया है जिसने तजी, रहता वही निरोग।। 


ग़ज़ल "मेरे प्रियतम" ( राधा तिवारी " राधेगोपाल " )


मेरे प्रियतम

मुसाफिर हूँ  मैं अदना सा, मेरी मंजिल तुम्हें पाना ।
राह कितनी भी टेढी हो, कभी बनना न बेगाना।।

 राह फूलों भरी तो मिल नहीं सकती यहाँ सब को।
 कठिन राहों में कर लेना सदा ही याद उस रब को ।।
परेशानी का इस जग में नहीं होता है पैमाना ।
राह कितने भी टेढ़ी हो कभी बनना न  बेगाना।।

 तेरे संग प्यार की डोरी से बंध जाऊँ मेरे प्रियतम।
 हमारा प्यार आपस में नहीं होगा कभी भी कम।।
 कभी राधे बुलाए तो जरूरी है तुम्हें आना।
 राह कितनी भी टेढ़ी हो कभी बनना न बेगाना

Wednesday, 20 June 2018

दोहे " चंचल विहग" (राधातिवारी "राधेगोपाल")

चंचल विहग
डोल रहा चंचल विहग, ढूँढ रहा है छाँव ।
बैठ पेड़ की डाल पर, कौवे करते काँव।।

उड़ता पंख पसार कर, आसमान में बाज ।
लगता है मिल जायगा, उसको ईश्वर आज।।

नील गगन में उड़ रहा, खग होकर बेचैन।
रहता सुख की खोज में, वह पंछी दिन रैन।।

मन मेरा पुलकित हुआ, देख फूल के बागl
तितली भवरें भी करें, फूलों से अनुरागll

जीव जंतु आहत हुए, ताक रहे आकाश।
नजर ना आता जल कहीं, मनवा हुआ उदास।।

सूखे अपने खेत है, सूखे हैं मैदान।
बारिश को है तरसता, पूरा हिंदुस्तान।।

नदी सूख कर बन गए, उसमें छोटे ताल।
जल बिन जीवन सभी का, हो जाता विकराल।।

Tuesday, 19 June 2018

दोहे" रावण की ससुराल" जोधपुर (राजस्थान) राधा तिवारी " राधेगोपाल"



 रावण की ससुराल
जोधपुर (राजस्थान)

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चलो चले हम घूमने ,अपने राजस्थान ।
जहाँ महल राजाओं के, कितने आलीशान ।।

नगर जोधपुर में विकट ,बाग सजा मंडोर।
 रावण की ससुराल भी, करती भाव विभोर ।।

पूजित होते हैं यहाँ राम भक्त हनुमान।
 राजस्थानी लोग तो ,होते भक्त महान ।।

राधे की पहचान है, प्यारा राजस्थान ।
वीर जन्मते हैं यहाँ ,करने को उत्थान।।

 शहर जोधपुर में बना, है उमेद का धाम।
 इसी जगह से जुड़ा है ,राधे  का भी नाम।।








Monday, 18 June 2018

दोहे "राधे का अरमान" (राधातिवारी "राधेगोपाल")

साड़ी सुन्दर दीजिए ,पत्नी को उपहार।
बदले में उससे मिले, उनका प्यार अपार।।

खीरे मूली आ गए, करने बहुत धमाल।
सबजी में सबसे अधिक, बिकें टमाटर लाल।।

माना आलू प्याज से, भरा हुआ बाजार।
लेकिन कच्चे आम का, खाते सभी अचार।।

हरी मिर्च धनिया हरा, इमली को लो साथ।
चटनी तभी बनाइये, जब खाली हो हाथ।।

गंगा फल चाहे कहो, लेकिन कद्दू नाम।
कच्चा-पक्का हर समय, आ जाता है काम।।

समझ करेले को दवा, खा लो आंखें मीच।
तन से ये इंसान के, मधुमेह ले खींच।।

छोटी सी दूकान पर, मिलता सभी सामान।

लोगों को ठगना नहीं, राधे का अरमान।।