Wednesday, 17 October 2018

ग़ज़ल "नहीं हमको आती हैं ग़ज़लें बनाना" (राधातिवारी "राधेगोपाल")

 मुश्किल हुआ आज दो जून खाना
नहीं हमको आती हैं ग़ज़लें बनाना

करो माफ गर दिल दुखा हो तुम्हारा
नहीं चाहते थे तुम्हें हम सताना

तुम्हारे तसव्वुर में दिन रात खोये
मगर भीड़ में तुम कहीं खो  जाना

दामन में यादे संजोई तुम्हारी
नहीं चाहते बे-वफा को बताना

तुम्हें देखकर आज भी दिल मचलता
मगर मशनवी हम बनाते बहाना

वहीं डूबी नौका जहाँ पानी कम था
नहीं पार हमको है आता लगाना

सुलगती है चिंगारियां जब दिलों में
राधे ये कहती अगन को बुझाना

Sunday, 14 October 2018

दोहे "होना नहीं उदास" (राधा तिवारी "राधेगोपाल")

 ताकत देता है सदा, बच्चों को ग्लूकोस
ताकत ही भरती सदा, है बच्चों में जोश।।

आना होगा समय से, छात्रों को इस्कूल।
 मन में लाओ न भावनाकोई ऊल-जलूल।।

 खेल खेलने से बढ़ेसदा परस्पर प्रीत। 
मेहनत करने से सदा, मिल जाती है जीत।।

 पुस्तक पढ़ने से मिले, सब लोगों को ज्ञान
विद्यालय में दूर हो, जाता है अज्ञान।।

 खेल खेलने के लिए, सब जाओ पास।
 निर्णायक कहते यही, होना नहीं उदास।।

कौशल दिखलाते यहाँ, हो सर्दी या धूप
सभी खिलाड़ी ढालते, खेलों के अनुरूप।।

Saturday, 13 October 2018

दोहे "जीवन से अनुबन्ध" (राधा तिवारी 'राधेगोपाल')

छोड़ा सिय के साथ कोसुन मूरख की बात।
सीता को होगा लगा, तब कितना आघात।।

मनुज आज तो कर रहाजीवन से अनुबन्ध।
नून-मिर्चगुड़ से हुआभंग आज सम्बन्ध।।

मधुमेह के रोग  काक्या होगा उपचार।
मत लोगों को दीजिएअब मीठा उपहार।।

नेता खाली कर रहेखुद सरकारी कोष।
लेकिन सजा भुगत रहेअब भोले निर्दोष।।

Wednesday, 10 October 2018

दोहे "विदा हुए हैं पितृगण" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


विदा हुए हैं पितृगण

 पर्वों पर  देते सभीअपनों को उपहार।
 हमें जगाने के लिएआते हैं त्योहार ।।

श्रद्धा के ही साथ मेंउन्हें लगाना भोग 
अंतरिक्ष में जो गएअमर हुए वो लोग ।।

रखना सबको पितृ गणसुखी और संपन्न।
 जो पुरखों को पूजतेहोते नहीं विपन्न।।

 विदा हुए हैं पितृगणजाते अपने धाम।
 एक साल तक स्वर्ग मेंकरना तुम आराम।।

 अपने पुरखो को सभीलगा रहे हैं भोग।
 एक साल के बाद मेंआता ये संयोग।।

Tuesday, 9 October 2018

कविता "बेड़ा पार हो गया" (राधा तिवारी 'राधेगोपाल')

जिसने पालन किया समय का,उसका बेड़ा पार हो गया।
 काम सदा ही करते रहना, जीवन का आधार हो गया ।।

समय बड़ा अनमोल है बंदे, करना सदा समय से बात।
 जो भी इस का मान करेगा, उसको नहीं मिले आघात ।।

पल पल काम करेगा जो भी, वह जीवन से पार हो गया।
 काम सदा ही करते रहना, जीवन का आधार हो गया।।

दोहे "पीपल-वट की छाँव" (राधा तिवारी 'राधेगोपाल')

आओगे जब पास मेंपूछेंगे तब हाल।
सजनी साजन के बिनाहोती है कंगाल।।

जीवन में लेना नहींकभी किसी की हाय।
पर अच्छे इंसान कीलेना हरदम राय।।

सत्य कभी मिटता नहींमिट जाता है झूठ।
छाता जब भी टूटतारहे हाथ में मूठ।।

पहले जैसे हैं नहींअब भारत के गाँव 
नहीं दिखाई दे रही, पीपल-वट की छाँव।।

अन्न  बिना होता नहींजग में कोई काम।
लेकिन आज किसान कोनहीं मिल रहा दाम।।

Saturday, 6 October 2018

दोहे " लाल बहादुर शास्त्री "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


 लाल बहादुर शास्त्री 
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सदा सादगी से रहे ,पूरे जीवनकाल।
 लाल बहादुर का रहाजीवन बड़ा कमाल।।

 सत्याग्रह कितने किएकरने देश आजाद।
 ऐसे मानव को सदासब करते हैं याद।।

 अंग्रेजों को देश सेबाहर दिया निकाल।
 बिना शस्त्र के कर दियातुमने बहुत कमाल ।।

बाल्यकाल में हट गयापिता का उनसे साथ।
 मात दुलारी ने रखाउनके सिर पर हाथ।।

 मिर्जापुर में था लियाजिसने विद्याज्ञान।
 विवाह ललिता से हुआसात हुई संतान।।

 गए देश हित में सदाबहुत बार ये जेल।
 अंग्रेजों की आप तोगए यातना झेल।।

 बागडोर इस देश कीले ली अपने हाथ।
 आगे किसी दबाव केनहीं झुकाया माथ।।