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Friday, 20 April 2018

"मेघ" राधा तिवारी ' राधेगोपाल'

                     
मेघ
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सर्व सुख दाता विधाता, हो मेरे मन भावना। 
नभ में मेघ बुलाकर करते, मौसम अतिसुहावना।। 

बारिशों की बूँदों से, पत्ते झूमें लहर हिलोर । 
तुम बसन्त में कर जाते हो, मन को बहुत विभोर।।

उमड़-घुमड़ कर जब तुम आते, सबके मन को हरसाते । 
गरज बरस कर ही जाते हो,  धरती पर हरियाली लाते।। 

रंग गन्दुमी जब भी नभ में, इधर उधर को मंडराए।
 तब सारी दुनिया कहती है, बादल आये बादल आए ।।

सूखी धरती करे निवेदन, बादल आओ बादल आओ। 
हरियाली उपजे धरती में, आकर पानी बरसाओ।। 

गर्मी से जब लोग तड़पते, तुम शीतलता लाते हो। 
तुम ही हो घनश्याम सलोने, राधे के मन भाते हो।।

Wednesday, 18 April 2018

सूर्य का प्रकाश

सूर्य का प्रकाश
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   सूर्य का प्रकाश जब भी मेरे आँगन आता है
सुर्य की  चटक किरणों से घर मेरा जगमगाता है

 अंधेरे को दूर भगा उजियारा वह करता है
 दुख दर्द की पीड़ा हर कर गीत खुशी के गाता है

 सूर्य की किरणें सदा हर हाल में मिलती रहे
 सूर्य की ही रोशनी से हर कली खिलती रहे

 चारों दिशाओं में रवि तेरा ही गुणगान हो
 सुबह सवेरे उठते ही तेरा ही सम्मान हो

 तुम से होते दूर अंधेरे तुम जीवन वरदान हो 
तुम बिन यह जग कुछ भी नहीं तुम ही तो भगवान हो 

तुम से ही हम सोते जगते तुम ही ईश महान हो
सुबह सवेरे मेरा आँगन तुमसे ही प्रकाशवान हो

Friday, 13 April 2018

दोहे "अम्बेडकर जयन्ती" (राधा तिवारी)

दलितों के अंबेडकर, तुमको कोटि प्रणाम।
संविधान निर्माण कर, पाया जग में नाम।।

भीमा देवी ने दिया, ममता और दुलार।
पिता राम का भी मिला, तुमको नेह-अपार।।

संविधान पर पुस्तकें, लिख कर पाया नाम।
स्वतंत्रता संग्राम में, झेले कष्ट तमाम।।

अपने बल पर ही मिला, तुमको भारत-रत्न।
देश-समाज सुधार के, किये बहुत प्रयत्न।।

बाबा ने कितने किये, दलितों पर उपकार।
आजादी के बाद में, दिया उन्हें उपहार।।

बलवानों के कर दिये, मनसूबे सब भंग।
संविधान ऐसा रचा, जगत रह गया दंग।।
राधा तिवारी (राधे गोपाल)
(राधा तिवारी "राधेगोपाल") 

Sunday, 1 April 2018

दोहे "एक गरीब किसान" (राधा तिवारी)

खेतों में से अन्न को, रहा किसान समेट।
धरती का भगवान तो, भरता सबका पेट।।

घर की रखवाली करे, बनकर टॉमी शेर।
चोरों की पहचान में, नहीं लगाता देर।।

पाल रहा सबका उदर, निर्धन श्रमिक किसान।
पर उसके सन्ताप का, नहीं हमें अनुमान।।

शरद ऋतु की रात है, घास फूस का धाम।
बिना रजाई के नही, चलता है अब काम।।

सोच-सोच कर रो रहा, एक गरीब किसान।
कपड़े तन पर हैं नहीं, आफत में है जान!!



Thursday, 22 March 2018

दोहे "फल देंगे भगवान" (राधा तिवारी)

भगवत गीता ने दिया, जन्म-मृत्यु का ज्ञान।
उत्तम करनी कर चलो, फल देंगे भगवान।।

गीता पढ़ना ध्यान से, रोज सुबह औ शाम।
कर्म अगर निष्काम हों, बन जायें सब काम।।

श्लोक सात सौ निहित हैं, अट्ठारह अध्याय।
भक्ति भाव से कीजिए,  तुम इनका स्वाध्याय ।।

भरा हुआ जिसमें सदा, ज्ञान रुप भंडार।
इसका वाचन नित करो, होंगे भव से पार।।

गीता का गायन करो, छोड़ शास्त्र विस्तार।
गीता की महिमा सदा, जग में अपरंपार।।

धन-दौलत मद मोह से, रहना सदा विरक्त।
माया के अभिमान में, मत रहना अनुरक्त।।

दिया पार्थ को कृष्म ने, गीता का उपदेश।
ज्ञान भक्ति के योग से,  मिट जातो हैं क्लेश।।

Monday, 12 March 2018

गीतिका "धरती का श्रृंगार" (राधा तिवारी)

नई नवेली दुल्हन जैसा यह प्यारा संसार है
हँसी-ठिठोली इसमें देखी हमको इससे प्यार है

आंचल में फुलवारी लेकर आई बसंत बहार है
नई नवेली दुल्हन जैसा ही प्यारा संसार है

पग-पग घुंघरू जैसे झरने सदा करे झंकार हैं
पर्वत जैसा मुकुट शीश पर धरती का श्रृंगार है

भीनी भीनी गन्ध धरा की रहती इसके कण-कण में
निर्मल पावन नीर गंग का करता सबसे करता प्यार है

नवयौवन सूरज ले आता जड़-जंगल मैदानों में
भाँति-भाँति के रंग दिखाती राधे की मनुहार है