Tuesday, 13 November 2018

दोहे "रहना हरदम साथ" (राधा तिवारी 'राधेगोपाल')

 
नेकी के हर काम काकरती हूँ  आगाज़।
 एक भरोसे राम केलगा रही आवाज़ ।।

दौलत-शौहरत से नहींहोती है पहचान 
काम सदा ही नेक होमन में लो यह जान।।

 हरियाली तो है नहींफिज़ाँ नहीं रंगीन।
 सूखी खेती देखकर, कृषक हुआ गमगीन।।

 वन में दिखते हर जगहकितने ही सारंग।
 कुछ चढ़ते है पेड़ पर, कुछ करते हुड़दंग।।

चारदीवारी को कभी, मत समझो तुम धाम।
 जहाँ रहे परिवार सब,  उसका घर है नाम।।

कितनी हो मजबूरियाँरहना हरदम साथ।
 मिलकर के तुम प्यार से ,सदा बटाना हाथ।।

 समस्याओं को देखकरमत होना हलकान।
 सहन करो हंसकर सभीजीवन के व्यवधान।।

Thursday, 8 November 2018

दोहे "कोजावत उपवास "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


कोजावत उपवास 
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कहे बिहार बंगाल में , कोजावत उपवास 
लक्ष्मी करने  रहीधरती पर आवास।।

 व्यापारी देना नहीं ,रुपया आज उधार 
सोच समझ कर कीजिए , तुम अपना व्यापार।।

 चंदा वर्षा कर रहा ,है अमृत की आज 
 ईष्ट देव को तुम भजोपूरण होंगे काज।।

 धवल चंद्र की चांदनीदेती सदा सुकून।
सबसे अच्छा है यहाँ , कुदरत का कानून।।

 आदिदेव मेरे करोमन से दूर विकार।


 ग़र नहीं पूजा आपको, तो  जीवन धिक्कार।।

Wednesday, 7 November 2018

दोहे " दीपोत्सव" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )



 दीपोत्सव
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 शिव जी ने पूरी करी, सबके मन की आस
आता श्रावण मास में, पर्व हरेला खास।।

 जन्मदिवस सरदार  का, मना रहा जग आज।
 लौह पुरुष इनको कहे, पूरा देश समाज।।

 लोह शस्त्रों टन लगा, प्रतिमा है अभिराम।
 विश्व पटल पर हो गया, भारत का भी नाम।।

मना रहा दीपोत्सव, पूरा भारत देश।

 झिलमिल के दीपक करें ,रोशन अब परिवेश।।

 जल का संचय कीजिए, करना जल का पान।
 जल होता अनमोल है, जल को  जीवन जान।।

 जीवन के हर राह में ,साथ निभाती नार।
 बनकर दुर्गा वो करें, जीवन नैया पार ।।


Tuesday, 6 November 2018

दोहे "नरकासुर का नाश" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

मेरे कष्टों को हरो, राम भक्त हनुमान।
कहकर सब जन कर रहे, गंगा में स्नान।।

श्री कृष्ण ने कर दिया, नरकासुर का नाश।
मुक्त किए बंधक सभी, खोले उनके पाश।।

नरकासुर की मौत थी, नारी के ही हाथ।
सतभामा ने था दिया, श्रीकृष्ण का साथ।।

बनी सारथी कृष्ण की, बंधक मुक्त कराय।
अब जग में कैसे रहे, ऐसे करो उपाय।।

कृष्णपक्ष के अन्त में, आया कातिक मास।,
छोटी दीवाली तभी, मना रहा संसार।।

तन पर तेल लगाय कर ,करो नित्य स्नान।
मुक्त नर्क से होइये, करके कुछ शुभ दान।।