Thursday, 13 September 2018

दोहे " कलम सदा चलती रहे"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 कलम सदा चलती रहे
दोहे मैं तो लिख दिएमैंने राधेश्याम।
 कलम सदा चलती रहेराधे की अभिराम।।

 धाम धरा धन छोड़करजाए वन की ओर।
 संत जनों ने छोड़ दी ,निज कुटुम्ब की डोर।।

 बच्चों से तो मोह हैलेकिन प्यारा कंत 
छोड़ो मत परिवार कोकहते ज्ञानी संत।।

 मोह जगत का छोड़ दोयह है मायाजाल 
साधु संतों के लिएसदन बना जंजाल ।।

कुटिया जंगल में बनाकरते साधन योग।
 ऐसे साधु संत कोलगता कभी  रोग।।

सरल स्वभाविक  संतजनकरता जग उद्धार।
 निर्धन बन वन में करेंजीवन नैया पार ।।
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