Monday, 4 June 2018

तालमेल (राधातिवारी "राधेगोपाल")


तालमेल 




मेरे मन में भावों के भंडार आ रहे।
अल्फाजों के अंदर से उद्गार आ रहे।।

 परिवार मैं तो आज कुछ कमी सी रह गई।
 मिलकर रहो सब साथ में विचार आ रहे।

 राहें भरी है फूल से ये कौन आ रहा।
लगता यही है आज तो दिलदार आ रहे।

सड़कों पर तो दिखते थे इंसान रात-दिन।
रातों को अब घरों में तो सियार आ रहे 

आपस में तालमेल को बनाया आज तक ।
तभी तो करने राधे को  वो प्यार आ रहे।