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Saturday, 2 June 2018

लहलहाते खेत (राधातिवारी "राधेगोपाल")








लहलहाते खेत



 शस्य श्यामला  है धरा ,ये  मेरे हिंदुस्तान की।
 वीणापाणि है बजाती, ताल लय सुर तान की ।।

लहलहाते खेत में ,झुकती फलों की डालियाँ।
नीर से परिपूर्ण झरने ,शान हिंदुस्तान की।।

 वादी- ए- कश्मीर में ही, फूल कितने हैं खिले ।
हाथ में दो सैनिकों के, कमान हिंदुस्तान की ।।

शीश जब झुक जाएंगे ,माता-पिता के सामने।
 तब कहेगी देवता, संतान हिंदुस्तान की।।

 गाते रहे हैं शान से, हम कुदरती सौंदर्य को ।
राधे कहे शायर सदा ,है जान हिंदुस्तान की।।