Tuesday, 31 October 2017

अरज माँ-बाप की भगवान से टाली नहीं जाती

अरज माँ-बाप की भगवान से टाली नहीं जाती।
दुआ मां बाप की जग में कभी खाली नहीं जाती।।

दुआ करते हमारे वास्ते, माँ-बाप हैं हरदम।
कभी उनकी तपस्चर्या जहाँ में आँकना मत कम ।।
सदा ये ध्यान रखना आँख में उनकी न पानी हो ।
कभी उनके लिए अपनी न कोई बदजुबानी हो।।
अरज माँ-बाप की भगवान से टाली नहीं जाती।
दुआ मां बाप की जग में कभी खाली नहीं जाती।।

कभी भूले भी उनका कहीं अपमान मत करना ।
हँसी के सुमन झोली में सदा माँ-बाप की भरना।।
जिन्होंने भूख खुद सहकर तुम्हारा पेट पाला है।
हमेशा अपने हिस्से का दिया तुमको निवाला है।।
अरज माँ-बाप की भगवान से टाली नहीं जाती।
दुआ मां बाप की जग में कभी खाली नहीं जाती।।

कभी माता-पिता के पास से तुम दूर मत होना ।
विपत्ति के समय अपना कभी धीरज नहीं खोना।।
चमकता सूर्य सा बनना, जगत को रौशनी देना।
कभी मत माँगना भिक्षा, कभी अहसान मत लेना।।
अरज माँ-बाप की भगवान से टाली नहीं जाती।
दुआ मां बाप की जग में कभी खाली नहीं जाती।।

Saturday, 28 October 2017

"छठ माँ का कर ध्यान" (राधे गोपाल)

भक्ति भाव से है भरा, कातिक का ये मास।
पूजा वन्दन को करें, मन में सब ले आस।।

सूरज की पूजा करो, जो जीवन का आधार।
 रवि-शशि के बिन है नहीं, दुनिया का कुछ सार।।

जाकर नदिया तीर पर, छठ माँ का कर ध्यान।
 संतानों की आयु का, माँगों सब वरदान।।

 लिए सुहागिन थाल को पहुँची नदिया तीर।
 रवि को अर्घ्य चढ़ा रही, हाथों में ले नीर।।

चली रिझाने मात को, लेकर गन्ना-धान।
पूजा थाली में भरा, मधुर-मधुर मिष्ठान।।

व्रत करके पूजा करो, कुशल रहेंगे बाल।
मनोकामना पूर्ण हो ,कह राधे गोपाल।।

Wednesday, 25 October 2017

"वीर हिंदुस्तान के" (राधेगोपाल)

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बिछ गए हैं जो धरा पर वीर हिंदुस्तान के ।
गुनगुनाते हैं सभी अब हम गीत उनकी शान के ।।
अपनी मां का लाडला वह उसका अभिमान था ।
जी रही थी देखकर के देश का वरदान था।।
संकटमोचन बहना का उसको बहुत दुलारा था।
रक्षा कवच बना भगिनी का सारे जग से न्यारा था ।।
मांग भरी सिंदूर में जिसके उसके सिर का ताज था ।
तेरी खातिर जग को छोड़ा तू उसका सरताज था ।।
बिछ गए हैं जो धरा पर वीर हिंदुस्तान के ।
गुनगुनाते हैं सभी अब गीत उनकी शान के ।।
कहां गया वह मां का लाडला ?कहां बहना का अभिमान है?
कहां गया वह साज-श्रृंगार? कहां देश का सम्मान है?
दूर देखो उस धरा पर वह सो रहा है शान से ।
लड़ रहा था अब तक जो दुश्मन से अभिमान से।।
हे धरा तू लाज रख जो तुझ पर मिटने को तैयार है ।
हे धरा के वीर हम सबको तुझसे प्यार है।।
बिछ गए हैं जो धरा पर वीर हिंदुस्तान के ।
गुनगुनाते हैं सभी अब गीत उनकी शान के ।।
राधेगोपाल