Saturday, 21 July 2018

दोहे " आज विदा नीरज हुए "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

आज विदा नीरज हुए

आँखों से आँसू बहे, कर नीरज को याद।
आप गये सुरपुर हमें, हुआ बहुत अवसाद।।

पद्मविभूषण का मिला, नीरज को सम्मान।
नीरज हिन्दी जगत के, थे व्यक्तित्व महान।।

क्रूर काल के चक्र पर, चले न कोई जोर।
इसीलिए तो श्वाँस की, टूट गयी है डोर।।

फिल्मों में जिसने लिखे, मनमोहक से गीत।
 इसीलिए संसार है, नीरज जी का मीत।।

 सन सत्तर के दशक में, मिले तीन सम्मान ।
नीरज जी का लोग सब, करते हैं यशगान।।

 अनुपम और अनमोल है ,नीरज जी के बोल।

 मसी लेखनी से उन्हें, कोई न सकता तोल।।

गीतकार नीरज हुए, दुनिया में मशहूर।
किन्तु काल के सामने, होते सब मजबूर।।

आते सब संसार में, लेकर अपना रूप।
जाते सब संसार से, क्या निर्धन क्या भूप।।

बालीवुड में आपने, लिखे सलोने गीत।
आज विदा नीरज हुए, छोड़ सभी से प्रीत।।

सुनाती हूँ गज़ल ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

सुनाती हूँ गज़ल
चँदा आ गया नभ में
 नींद मेरी मुकरती है

 तारे गिन रही हरदम
 यूँ राते गुजरती है

 बेचैनी सताती है
 कहाँ से चैन मैं लाऊँ

 जहां सारा ही सोया है
आंख सोने से डरती है

 बुलावे रोज आते हैं
 हमें महफिल में आने को

 सुनाती हूँ गज़ल जब भी
 याद तुमसे गुजरती है

 उठाती हूँ मैं हाथों को
 दुआओं के लिए जब जब

 तेरी तस्वीर आंखों में
 सदा मेरे उतरती है


Friday, 20 July 2018

बाल कविता"नन्हे मुन्ने" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

नन्हे मुन्ने
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आओ काले बादल आओ

 जल्दी से नभ में छा जाओ

नन्हे मुन्ने तुम्हें बुलाते

 देखो कितना वो हर्षाते

 घर में छाता कहीं छिपाते

 बारिश देखके खुश हो जाते

 इन पर कुछ तुम तरस तो खाओ


 आओ काले बादल आओ

Thursday, 19 July 2018

ग़ज़ल "मां की नजर" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

ग़ज़ल "मां की नजर"
कठिन लक्ष्य है और लम्बा सफर है
हमारा तो काबा हमारा ही घर है

दुआओं  में माँ की ये कैसा असर है
हमारा तो काबा हमारा ही घर है

 किए जुल्म दुनिया ने हम पर बहुत से
मगर फूल जैसी हमारी डगर है

अनजान राहों में हम जब भी  निकले
 जंगल में भी मिलता हमको नगर है

 दिखता नहीं है हमें कोई अपना
काफी है हम पर कि, मां की नजर है

 कांटो भरी भी अगर राह देखूं
राधे का कटता खुशी से सफर है

कठिन लक्ष्य है और लम्बा सफर है
हमारा तो काबा हमारा ही घर है

Saturday, 14 July 2018

पुस्तक निमोचन "आमन्त्रण स्वीकार करें"

कृपया राधा तिवारी का 
आमन्त्रण स्वीकार करें।
मान्यवर,
     साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा 15 जुलाई, 2018 को अपराह्न् 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया रहा है। जिसमें-
श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित “सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं “जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का विमोचन।
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का विमोचन।
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तत्पश्चात कवि गोष्ठी
जिसका सीधा प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर किया जायेगा।
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हमारे अभ्यागत
डॉ. राकेश चन्द्र रस्तोगी, (सी.एम.डी. खटीमा फाइबर्स), माननीय पुष्कर सिंह धामी मा.ओमप्रकाश (सम्पादक-ट्रू मीडिया-दिल्ली) मा. विजय नाथ शुक्ल (उप जिलाधिकारी), गोपाल दत्त तिवारी, भुवन चन्द्र कापड़ी, श्रीमती सोनी महरा (खण्ड शिक्षा अधिकारी), डॉ.सिद्धेश्वर सिंह, डॉ. मुकेश कुमार।
इस अवसर पर आप सादर आमन्त्रित हैं।
स्थान- ब्लॉक सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर)
समय-अपराह्न 2 बजे से

निवेदक
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’   डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’    श्रीमती राधातिवारी
   अध्यक्ष            महासचिव                कोषाध्यक्ष

एवं समस्त सदस्य व पदाधिकारीगण।
साहित्य शारदा मंच (पंजीकृत), खटीमा (ऊधमसिंह नगर)
मोबाइल नम्बर-
7906360576,   708188951,  9997771969


Friday, 13 July 2018

बाल कविता " पंछी" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 पंछी
नभ में सूरज है आता।
जाने कहाँ चन्द्र छिप जाता।

 पंछी छोड़ घोसलें आते।
 नभ में उड़ कर खुश हो जाते।।

 बच्चे भरते हैं किलकारी ।
वो लगती  है कितनी प्यारी ।।

नीरवता कुल रात समाई।
किन्तु धरा भी है मुसकाई।।

 माँ ने अब आवाज लगाई।.
छोड़ो बिस्तर और रजाई।l

 दिन में करना पूरे काम।
 रातों को लेना विश्राम।।

Thursday, 12 July 2018

कविता"कर दो कान्हा भव से पार" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

कर दो कान्हा भव से पार
 तुम कान्हा हो मैं हूं राधा।
 मेरा जीवन तुम बिन आधा।।

 दूर अगर  चाहोगे जाना।
 फिर मुश्किल है हम को पाना ।।

बंधी तुम्हीं से जीवन डोर ।
खींच रही जो तेरी ओर।।

 तुमसे जीवन में उजियारा ।
चहूँ ओर तुम बिन अंधियारा ।।

तुमसे मेरी जीवन नैया।
 तुम बन बैठे हो खेवैया ।।

तुम राधा के तारणहार ।
कर दो कान्हा भव से पार।।