आंसू
आंसू जब तक आंख में रहते कोई समझ नहीं पाता
सहन नहीं होती जब पीड़ा तब वो बाहर आता
नेत्र लाल जब हो जाते हैं सबको ये जतलाते
टपक के आंसू आंख से दिल के भेद सभी खुल जाते
दुख के आंसू खुशी के आंसू विस्मित हैं कर देते
टपक टपक गालों पर आते सब को तब दिख जाते
पल खुशियों से भरा जो आया तब भी बहते आंसू
दुखिया की पीड़ा को हरदम कहकर जाते आंसू
दबी हुई है जो भी दिल में बात बताते आकर |
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Wednesday, 6 March 2019
कविता, आंसू, ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
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