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Monday, 19 September 2022

राधा तिवारी राधेगोपाल , बाल कविता , मोटू पतलू

 



 मोटू पतलू 

 मोटू पतलू भाई दो
 जाने क्यों रो रहे हैं वो
 मोटू कहता खाता जाऊँ 
भूख लगे तो सो नही पाँऊ
 पतलू को आया जब गुस्सा
 उसने मारा उसको घुसा
 गुस्से से हुई आंखें लाल
बदल गई पतलू की चाल
माँ नें तब आवाज लगाई
 अंदर आए दोनो भाई
 माँ ने उनको तब समझाया
 आपस का सब बैर भुलाया
 आपस में  हो भाई दो
लड़ कर यूं  बचपन  मत खो

Saturday, 14 September 2019

बाल कविता, " गुड़िया " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )


गुड़िया
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माँ लाई है प्यारी गुड़िया
 उसको  वस्त्र पहनाऊंगी

 हरे रंग का लहगाँ होगा
 चूनर लाल ओढाउँगी

 खाना खाने बैठूंगी जब
उसके हाथ धुलाउँगी

 रूठेगी जब  प्यारी गुड़िया
 उसको सदा मनाऊंगी

 परेशान गर्मी से होगी
तब उसको नहलाऊंगी

 प्यारी प्यारी मेरी गुड़िया
 को हरदम सह लाऊंगी

Wednesday, 31 July 2019

बाल कविता , " खुशी " (राधा तिवारी " राधेगोपाल " )



 खुशी 
चलो आज  मिलकर खेलेंगे
 खेल को खेल के जैसे
 खुशी  ये मिल नहीं सकती
 लूटा कर जेब के पैसे
आपस में मिलजुलकर
करना बच्चों सारे खेल
तकरार कभी भी मत करना
 आपस में रखना सबसे मेल
 शिक्षक जब कुछ भी समझाते
 सुनना रखकर ध्यान
 लेकर उनके आशीशों को
 जग में बनो महान



Wednesday, 3 July 2019

बाल कविता, " चिड़िया " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )




बाल कविता
 चिड़िया
मुझको तो अच्छी लगती है
 आंगन में जब आती चिड़िया
 आ करके ची ची करती है चिड़िया भी डाल पर झूला झूले कभी गगन में उड़ती है
 कभी उड़ान वो सीधा भर्ती चुपके से फिर मुड़ती है
 दाना चुगती है यह दिन भर आपस में यह लडती है
 मां मुझको एक बार बता दो कब यह चिड़िया पड़ती है

Monday, 20 May 2019

बाल कविता, "पेड़ लगाओ" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल ")



पेड़ लगाओ
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सूरज जब नभ में आता है
 तन सबका ही झुलसाता है 
घर के अन्दर जाते लोग 
ताकि वो सब रहे निरोग 
ढूंढ रहे पेड़ों कि छाया 
पर अब पेड़ कहीं न पाया 
समय समय पर पेड़ लगाओ 
ताप धरा का दूर भगाओ 
ककड़ी तरबूजा तुम खाओ 
इससे शीतलता तुम पाओ 
जो नीम्बू का पीते जूस 
गर्मी से रहते महफूज़ 
हर प्राणी एक पेड़ लगाओ 
धरती पर हरियाली लाओ 

Wednesday, 15 May 2019

बाल कविता, "बढ़ता ताप " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल ")


बढ़ता ताप 
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सूरज का जब बढ़ता ताप 
तब पानी बन जाता भाप 
उड़ कर के आकाश में जाता 
कोई उसको देख न पता 
सूखी नदिया , छरने सूखे 
चेहरे सबके हो गए रूखे 
नीम्बू कि अब आई बहार 
पीलो पानी बार बार 
तेज हो रही है अब धुप 
बिगड़ रहा है सबका रूप 
बच्चों घर के अन्दर आओ 
घर में तुम शीतलता पाओ   

Friday, 26 April 2019

बाल कविता, " हाथी और चींटी " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


हाथी और चींटी 
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भीम काय होता है हाथी और बहुत नन्ही है चींटी 
हाथी से सब डरते रहते चींटी है सबने पीटी

हाथी के हैं कान निराले 
जाने उसने कैसे पाले 
चींटी तो है नन्हा प्राणी 
नही सुनी है उसकी वाणी 

गज पर हाथ लगा नही सकते पर्पकड़ के छित्ती खींची 
भीम काय होता है हाथी और बहुत नन्ही है चींटी 

टनों का खाना खाता हाथी 
महावत होता उसका साथी 
चींटी कण से ही पलती है 
लगातार ही वो चलती है

गुड का दान दिया हाथी को चींटी अतत देकर सींची 
भीम काय होता है हाथी और बहुत नन्ही है चींटी 

Monday, 22 April 2019

बाल कविता, "रवी " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


बाल कविता
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रवी तुम्हारा इंतजार ।
कर रहा सारा संसार।।
 लगते हो तुम सबको प्यारे।
 नभ मे हो तुम सबसे न्यारे।।
 आसमान में जब आते हो।
 धरा में किरणें बिखराते हो।।
 जो भी दर्श तुम्हारा पता ।
नई उर्जा तुमसे पाता ।।
पक्षी  कलरव करने लगते।
 इंसान तुमको देख कर जगते।।
 बीत गई अब काली रात।
 अब कर लो सब काम की बात।।

Wednesday, 17 April 2019

बाल कविता, " छोड़ो बिस्तर और रजाई " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


छोड़ो बिस्तर और रजाई
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जब नभ में सूरज है आता।
जाने कहाँ चन्द्र छिप जाता।
 पंछी छोड़ घोसलें आते।
 नभ में उड़ कर खुश हो जाते।।
 बच्चे भरते हैं किलकारी ।
वो लगती  है कितनी प्यारी ।।
नीरवता कुल रात समाई।
किन्तु धरा भी है मुसकाई।।
 माँ ने अब आवाज़ लगाई।.
छोड़ो बिस्तर और रजाई।
 दिन में करना पूरे काम।
 रातों को लेना विश्राम।।

Monday, 1 April 2019

बाल कविता, " तितली " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )


बाल कविता
तितली
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 बगिया में आती है तितली
 हमको बहुत लुभाती तितली
 रंग बिरंगी प्यारी-प्यारी
 जिन से खिलती है फुलवारी
 रस लेती है फूलों से
 बचती है वह शूलों से

Monday, 25 March 2019

बाल कविता, " मेरा छाता "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )



बाल कविता
मेरा छाता
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 रंग बिरंगा मेरा छाता
जो बारिश से मुझे बचाता
 जब घनघोर घटाएं छाती
मेघ गर्जना मुझे डराती
 तब तब मैं ले आती छाता
वर्षा में यह मुझे लुभाता