"कल्याण करो माँ"
हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी, माँ
मुझमें तुम ज्ञान भरो
तिमिर नाश मन का करके माँ ,मेरा
भी कल्याण करो।
क्रोध मोह माया को माता, तुम
ही तो हर सकती हो।
शरण तुम्हारी आई हूँ मैं, ज्ञान
पुंज भर सकती हो।
हे माँ हंस सवारी माता, कष्टों
को तुम सभी हरो।
तिमिर नाश मन का करके माँ ,मेरा
भी कल्याण करो।।
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