अच्छी सेहत
सैर सपाटे के लिए, सुबह शाम अनुकूल ।
अच्छी सेहत के लिए, सैर न जाना भूल ।।
बच्चों को लेकर चले ,दादा करने सैर।
पोतों से वह बोलते, करो न जग में बैर ।।
रहकर के संग शूल के, मुस्काते हैं फूल।
पर मेरे आंसू गिरे, जब चुभ जाते शूल ।।
सुख को पाने के लिए ,दुख मत जाना भूल।
सुख दुख का तो संग है, इस जीवन का मूल ।।
ड्राइवर के तो हाथ में ,होती सबकी जान।
स्टीयरिंग को खींचकर,रखना सदा कमान।।
काबू खर्चे पर करो ,अगर न्यून हो आय।
आज किया सब खर्च तो, कल को फिर क्या पाय।।
कूड़े में से बिनते, पशु अपना आहार।
चारा देकर ही उन्हें, कर देना उपकार।।
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Sunday, 24 February 2019
दोहे, " अच्छी सेहत " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
Saturday, 23 February 2019
दोहे, " उनसे जब नजरे मिली " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
नजरें भर कर देखते, हम को बारंबार ।।
नजरो से नजरे मिली, बढा आपसी प्यार।
नजर चुरा जब वो गए, बदल गया व्यवहार।।
नजरों में रखते हमें ,अब तो वह दिन रैन।
किसने चोरी कर लिया, मेरे दिल का चैन।।
जब अखियाँ करने लगी, नैनों में ही बात ।
रहते लब खामोश है, समझो तुम जज्बात।।
स्वप्न सलोने आ रहे, रातों में हर बार ।
आते जाते राह में, हम खोए शत बार।।
हमको घायल कर दिया, दे नजरों के तीर।
कितने अच्छे लग रहे, राम लखन से वीर ।।
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Friday, 22 February 2019
दोहे, "सुगंधित फूल " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
सुगंधित फूल
जो ईश्वर को है भजे, करके पूजा जाप।
उनके हरदम हैं हटे, जीवन से संताप।।
देवो को मत भूलना, बनकर तुम धनवान।
हाथ बढ़ाकर कीजिए, जग मैं तुम शुभ दान।।
राधा तेरे द्वार पर, झोली रहे फैलाय।
माँ ऐसा वर दीजिए, जन्म सफल हो जाय।।
रिश्ते नाते जोड़ना, है जग का दस्तूर।
अपनों को करना नहीं, कभी हृदय से दूर।।
गुलशन को महका रहे, सदा सुगंधित फूल।
खुशहाली मिलती सदा, खुशियों के अनुकूल।।
गंगा जी के घाट पर, उमड़ा जनसैलाब।
जो सच्चे मन से भजे, पूरे होते ख्वाब।।
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Thursday, 21 February 2019
दोहे, " भोले शंभू नाथ " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )
भोले शंभू नाथ
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ईश्वर कर देते सदा, हर मुश्किल आसान।
हरदम करना चाहिए, ईश्वर का गुणगान ।।
नियमित पूजा जाप से, होते देव प्रसन्न।
सुख देते सबको यहाँ , कर देते संपन्न।।
कृपा ईश की हो अगर, होंगे सब खुशहाल।
कृपा हीन करते यहाँ , जग मैं बहुत बवाल।।
जाना हो यदि आपको, माता के दरबार।
करना सबके साथ में, माता की जय कार।।
धूप दीप हो हाथ में, पुष्पांजलि हो साथ।
भांग धतूरा चाहते, भोले शंभू नाथ ।।
इस जग में हरदेव की, होती जयजयकार।
मानव से करना यहाँ , आप मृदुल व्यवहार ।।
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