Thursday, 18 November 2021

राधा तिवारी ,"राधेगोपाल ", *रक्तबीज कोरोना* विधा *गीत*

 



*रक्तबीज कोरोना* 
विधा *गीत*
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बिमारी
मानव घर में छिप कर बैठा
है उसकी कैसी लाचारी

क्यों आया ये कहाँ से आया
ये तो हमको पता नहीं
मार रहा है निर्दई हो कर
जिनकी कोई खता नहीं
रोग बना है बड़ा तामसी
जकड़ी है दुनिया सारी।
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी

खाकी वर्दी धारी आए
साथ में अपने डॉक्टर लाए
साफ सफाई करने देखो
हमने कितने ईश्वर पाए
हँसते गाते खुश हो करके
खेल रहे सब अपनी पारी
रक्त बीज कोरोना आया
बनकर देखो एक बीमारी

जीव जंतु के जैसे हम सब 
पिंजर में है आज फँसे 
घूम रहे हैं वह सब देखो 
और हमीं पर आज हँसे  
आल्हादित्त मत होना इंसान
भीर सभी पर है भारी 
रक्त बीज कोरोना आया 
बनकर देखो एक बीमारी
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Sunday, 14 November 2021

राधा तिवारी "राधेगोपाल" , मनहरण घनाक्षरी , "चाँद "

 



चाँद 
चाँद  को चकोरी से
 चकोरी जी को चाँद से
 एक दूजे से तो हमें
प्यार होना चाहिए

दिन को तो रात से
और रात को तो दिन से
अंधेरे को उजाले में
भी तो होना चाहिए

रात का नजारा कहे
अरे वह सितारा का है
आज आंख मूंदकर
घर सोना चाहिए

माताजी का प्यार मिले
पिता मनुहार करे 
गोदी में ही रहकर
हँस रोना चाहिए

*राधा तिवारी"राधेगोपाल"*


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राधा तिवारी , " राधेगोपाल" , दोहा छंद , "आजादी"

 


 - *आजादी*
विधा - दोहा छंद


*आजादी* फिर छीनताएक विदेशी रोग।
बैठ गए अब धाम में,सकल विश्व के लोग।।1।।

*आजादी* से घूमनामूरख की पहचान।
सुन लो जब तक जान हैसुंदर लगे जहान।।2।।

*आजादी* मत दो उसेरखो कैद में रोग।
बचने को इस रोग सेकरते रहना योग।।3।।

*आजादी* यदि चाहिएरखना इतना ध्यान।
हाथ जोड़कर कीजिएसबका ही सम्मान।।4।।

कोरोना अब खेलता,देखो कैसा खेल,
 *आजादी* में खुद फिरे,मानव को दी जेल।।5।।

*राधा तिवारी"राधेगोपाल"* 

Saturday, 13 November 2021

राधा तिवारी राधेगोपाल , घनाक्षरी , "रोटी दिलवाइए"

 



रोटी दिलवाइए
 कोरोना का रोग भारी 
आई कैसी महामारी
घर में ही रहने को
आप समझाइए

घर में ही रहते हैं
भूख प्यास रहते हैं
निर्धन को भी आप
रोटी दिलवाइए

चौपाट है काम धाम
बंद है सारे आयाम
जलती है पेट में जो
 अगन बुझाईए

चले रोग कैसा चाल
सारा जग है निढाल
घर में ही रहकर
जिंदगी बचाइए

दुश्मन चले चाल
जीना तो हुआ मुहाल
मजबूरी का न आप
फायदा उठाइए

*राधा तिवारी"राधेगोपाल"*
*खटीमा*
*उधम सिंह नगर*
*उत्तराखंड*
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Wednesday, 10 November 2021

राधा तिवारी "राधेगोपाल" , घनाक्षारी , " वीभत्स रस "




 विषय *वीभत्स रस*

विधा *घनाक्षारी*

आया है ये कैसा काल
कोरोना का फैला जाल
बिछती धरा पे आज
कितनी ही लाश है

देख रहे गिद्ध आँख
रोक रहे हैं वो पाँख
शव पे तो चोंच से वो
डाल रहे पाश हैं

तड़प रहे हैं लोग
तंग करता है रोग
उपचार इसका ही
बन जाए काश है

सूरा की बोतल खाली
नोट सभी आए जाली
हाथों में ही रह गए 
 नए नए ताश हैं